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छत्तीसगढ़ धान उपार्जन केन्द्रों की खुली पोल, शासन – प्रशासन का दबाव के बाद भी केन्द्रों पर अनियमितताओं की बाढ़, जशपुर में करोड़ों की गड़बड़ी से प्रशासन में हड़कंप।

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छत्तीसगढ़ मना रहा है धान खरीदी उत्सव वहीं दुसरी ओर किसानों का आरोप.. खरीदी अपने अंतिम पड़ाव फिर भी समस्याओं का समाधान करने के बजाय किसानों के लिए गले का फांस बना धान बेचना ? किसान आरंभ से जुझते नजर आया 25 वर्षों में पहली बार सुशासन की सरकार में किसानों के भीतर आक्रोश नजर आया छोटे मंझले किसानों को टोकन से लेकर लिमिटेशन के नियमों से लेकर सत्यापन नमी बदला व पूराने धान का हवाला देकर जिम्मेदार कर्मचारी परेशान करते नजर आये, अब शासन की मंशा चाहे जो भी कार्यकाल के अंतिम वर्षों में सुधार कर भरपाई करने की योजना कहीं भारी ना पड़ जाए जनता शांत जब जब दिखाई देता है तब तब परिवर्तन सुनामी बन कर आई है।

रायपुर/रायगढ़/विशेष संवाददाता/खबर डेक्स_08/जनवरी/2026

छत्तीसगढ़ में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की व्यवस्था एक बार फिर गंभीर विवादों में घिर गई है। प्रदेश के कई जिलों से धान खरीदी केंद्रों में भारी अनियमितताओं, अव्यवस्था और भ्रष्टाचार की शिकायतें सामने आ रही हैं। किसानों का आरोप है कि टोकन वितरण से लेकर तौल, भंडारण और धान उठाव तक हर स्तर पर गड़बड़ियां हो रही हैं। इस बीच जशपुर जिले में सामने आए करोड़ों रुपये के कथित घोटाले ने पूरे सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

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जशपुर में हजारों क्विंटल धान गायब, करोड़ों का नुकसान।

जशपुर जिले के एक धान खरीदी केंद्र में की गई प्रशासनिक जांच के दौरान रिकॉर्ड में दर्ज धान और वास्तविक भंडारण में भारी अंतर पाया गया। प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार हजारों क्विंटल धान की कमी सामने आई है, जिससे शासन को करोड़ों रुपये के आर्थिक नुकसान की आशंका जताई जा रही है। जांच में समिति प्रबंधक, कर्मचारियों और संबंधित अधिकारियों की भूमिका संदेह के घेरे में आई है। सूत्रों के मुताबिक मामले में एफआईआर दर्ज करने और विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

 Ø टोकन, तौल और उठाव में अव्यवस्था।

जशपुर ही नहीं, बल्कि प्रदेश के कई अन्य जिलों में भी किसानों को धान बेचने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि राज्य सरकार ने चुनावी वादों में जो मोदी की गारंटी की बात कही थी एक एक दाना धान खरीदी करेंगे,वह कहीं ना कहीं फेल साबित होता दिखाई पड़ रहा है, ऑनलाइन टोकन तुहर द्वार अप मज़ाक बनकर रह गया, वनांचल सुदुरक्षेत्र में खुलता नहीं है और खुल भी गया तो आवश्यकता अनुसार टोकन कटता नहीं है, वहीं जब शासन द्वारा 21 किवंटल धान लेने की घोषणा किया है, तो पंजीकृत किसानों से कम धान खरीदी को लेकर छलावा आरोप लगाया  है, रकबा में कटौती का खेल खेलकर पटवारी लूट मचाएं है, किसान की मजबूर है हर हाल में जितना हो सके धान मंडी में बिक्री हो, चाहे इसके लिए किसान अधिकारी पटवारी या फड़ प्रभारी को पैसे देकर अपना काम चलाए ? शासन की सख्ती से अवैध धान पर अंकुश लगा हो ऐसा शत-प्रतिशत गारंटी नहीं है पर यह जाहिर है इस वर्ष जो किसान परेशान हुआ और धान उपार्जन केन्द्रों में पटवारी अधिकारी प्रभारी का जिस तरह से शिकार हुआ है ऐसा कभी नहीं हुआ था अन्नदाता के साथ व्यवहार जो इस बार हुआ? धान उपार्जन केन्द्रों में शिकायतों की झड़ी..

  • समय पर टोकन नहीं काटे जा रहे।
  • सर्वर डाउन का हवाला देकर किसानों को लौटाया जा रहा है।
  • तौल के दौरान कम वजन दिखाने और नियमों के विपरीत बोरे खुलवाने जैसी शिकायतें आम हो गई हैं।
  • कई केंद्रों पर बारदाने की कमी और धान उठाव में देरी के कारण किसान कई-क दिन तक केंद्रों में इंतजार करने को मजबूर हैं।
  • फर्जी खरीदी और रिकॉर्ड में हेरफेर के आरोप।

किसान संगठनों  नेताओं और स्थानीय जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि जशपुर – रायगढ़ जिले के कुछ धान खरीदी केंद्रों पर फर्जी खरीदी दिखाकर सरकारी रिकॉर्ड में हेरफेर किया जा रहा है। भौतिक सत्यापन और ऑनलाइन डेटा में अंतर पाए जाने से यह आशंका और गहरी हो गई है कि सुनियोजित तरीके से घोटाले को अंजाम दिया गया है। इसके अलावा, धान बेचने के नाम पर अवैध वसूली की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। जशपुर – रायगढ़ जिला सीमावर्ती राज्य उड़ीसा से सटा हुआ क्षेत्र के धान उपार्जन केन्द्रों में इस वर्ष अवैध धान ना पहुंचे इसके लिए स्थानीय प्रशासन ने पूर्व योजना बना कर मुख्यमार्ग में बेरिकेडिंग कर चौकसी कड़ी रखी है वहीं जंगल भीतर के अस्थाई मार्ग को पूरी तरह से बंद करने का प्रयास किया था परन्तु सूत्र बताते हैं जिन मार्गों को सील करने का प्रयास किया गया था वह कुछ दिनों बाद पूर्ववत जैसा सतत् जारी है मार्ग अवरूद्ध करने के लिए जो गड्ढे किये गये थे उन्हें पुनः पाठ कर आवागमन के लायक बना दिया गया है, कारण उन रास्तों का उपयोग अनेक गांवों के लोग सार्ट कट बाइपास के रूप में वर्षों से काम में ला रहे हैं। वास्तव में देखा जाये तो अवैध धान की खपत राज्य के अनेक उपार्जन केन्द्रों में बड़ी आसानी से किया जा रहा है वो भी बड़े पैमाने पर वहीं जितनी भी अवैध धान धर – पकड़ देखने को मिला वह किसानों या छोटे व्यापारियों का होना पाया गया है, इसका कारण है इस बार पंजीयन से बहुत कम धान की उत्पादन हुआ है , किसानों का सीधा आरोप है फसल की पैदावार कम होने पर से राज्य शासन की हाथ पांव फूले हुए धान खरीदी के लक्ष्य से कम धान खरीदी करना चाहती है, ऐसे सरकार से भविष्य में उम्मीद रखना बैमानी है जबकि अवैध धान की खरीद बिक्री करने वाले बड़े कोचियों को शासन प्रशासन अपनी गोद में बैठाकर सारे प्रपंच कर रही है, कार्रवाई सिर्फ किसानों व छोटे दुकानदारों पर ही हुआ है कार्रवाई या दिखावा कैसे हो रही  यह चिंतन का विषय है, बताया जा रहा है बड़े बड़े सेठ महाजन व नेताओं का धान पहले ही पहुंच जाता है जहां पहुंचना चाहिए ? कहा तो यहां तक जाता है खुद अधिकारीयों के देख रेख में गाड़ीयों मंजिल तक पहुंचतीं है जिसमें बहुत पावरफुल व्यक्तियों का नेटवर्क कार्य करता है, धान खरीदी उत्सव छत्तीसगढ़ शासन की बजट में सबसे अधिक खर्च होने वाला योजनाओं में एक है, यह अवैध रूप से कम लागत में शुद्ध करोड़ों रुपए का धंधा है। जो हर साल चलता रहता है, राज्य के अधिकांश समिति के अध्यक्ष उपार्जन केन्द्रों के प्रभारी लंबे समय से इन्हीं के सरपरस्ती में एक ही स्थान पर पदस्थ होकर कुंडली जमाकर बैठे हैं, जहां धान खरीदी करना भारी दबाव वाला कार्य मानने वाले इतने भारी दबाव होने पर भी धान उपार्जन को कभी छोड़ना क्यों नहीं चाहते हैं?

रायगढ़ जिले के अधिकांश धान उपार्जन केन्द्रों की स्थिति खराब, खरसिया, पूसौर, धरमजयगढ़, लैलूंगा, तमनार, घरघोड़ा विकास खण्ड अंतर्गत संचालित उपार्जन केन्द्रों में किसानों की समस्याओं को सुनने वाला कोई नहीं है वहीं सूत्रों कहना है की किसानों से अवैध वसूली अपने चरम पर है, बिना पैसों के पटवारी, आपरेट या प्रंबधक बात तक नहीं सुनता है आम तौर पर सामने आ रहीं गड़बड़ियां

  • ऑनलाइन रिकॉर्ड और भौतिक स्टॉक में भारी अंतर।
  • बिना टोकन खरीदी/तौल।
  • मिलिंग – परिदान में अनियमितता।
  • तकनीकी त्रुटियों से किसानों का पंजीयन निरस्त होना।

किसानों के सामने भारी दबाव का रोना रोने वाले अस्थाई व मनोदय पर कार्यरत कर्मचारीयों के हौसलों को सलाम है या भीतर से दाल में काला नज़र आता है जानकार बताते हैं घड़ियाल आंसू बहाने वाले बेहिसाब धन अर्जित कर धान उपार्जन केन्द्र में बैठकर कर सरकार को चुना लगाने किसी भी तरह से पीछे नहीं रहते हैं सरकार किसी का हो इनकी जड़ें बहुत मजबूत है, इनके पास हर मर्ज की दवा होती है, इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है हाल में मुख्यमंत्री के गृह जिले में जिस तरह का भ्रष्टाचार सामने आया है वह कुछ भी नहीं है, राजनीतिक दल के लोगों का प्रभाव चरम पर होता है।

रायगढ़ – जशपुर जिले में धान उपार्जन केन्द्र उप केन्द्रों में लंबे समय से पदस्थ कर्मचारियों की जांच होनी चाहिए, साथ भी हर किसान को अपनी समस्या शिकायत करने का स्वतंत्र व्यवस्था देना चाहिए आनलाइन या उपार्जन केन्द्रों में शिकखयत पेटी की व्यवस्था होनी चाहिए।

धान खरीदी में हो रही इन गड़बड़ियों से किसानों में भारी नाराजगी है। जशपुर समेत कई जिलों में किसानों ने विरोध प्रदर्शन किया है और चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ और दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे। किसानों की मांग है कि धान खरीदी प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी हो और ईमानदार किसानों को किसी भी तरह से परेशान न किया जाए।

-:प्रशासन का पक्ष:-

प्रशासन का कहना है कि जशपुर में सामने आए मामले को गंभीरता से लिया गया है। जांच टीमों को सक्रिय कर दिया गया है और जहां-जहां अनियमितताएं पाई जा रही हैं, वहां संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। साथ ही, धान खरीदी व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए डिजिटल मॉनिटरिंग और सतत निगरानी के निर्देश भी दिए गए हैं।

:निष्कर्ष:-

जशपुर में उजागर हुई करोड़ों की गड़बड़ी ने यह साफ कर दिया है कि छत्तीसगढ़ की धान खरीदी व्यवस्था में सख्त निगरानी और जवाबदेही तय करना अब बेहद जरूरी हो गया है। जब तक दोषियों पर कठोर कार्रवाई नहीं होती, तब तक किसानों का भरोसा बहाल होना मुश्किल है।

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