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भालूमार, घरघोड़ा में पर्यावरण पर खुला हमला।

फलदार वृक्षों की अवैध कटाई से हड़कंप, प्रशासनिक चुप्पी पर उठे सवाल।

सवालो के घेरे में वन विभाग की कार्यशैली – संरक्षण के नाम पर भक्षण।

घरघोड़ा | रायगढ़ | 30 जनवरी 2026

सुनील जोल्हे विशेष संवाददाता छत्तीसगढ़ cnewsbharat

घरघोड़ा तहसील अंतर्गत ग्राम भालूमार में बड़े पैमाने पर वर्षों पुराने फलदार एवं बहुमूल्य वृक्षों की अवैध कटाई का गंभीर मामला सामने आया है, जिससे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार यह कटाई ग्राम बजरमुडा निवासी श्रीमती निशा पटेल, पति कन्हैया लाल पटेल द्वारा हाल ही में क्रय की गई लगभग 10 एकड़ भूमि पर कराई जा रही है।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार उक्त भूमि पर वर्षों से आम, महुआ, कटहल, अमरूद, जामुन, इमली, बेल, सीताफल, बहेड़ा, हर्रा, आंवला सहित अनेक बहुवर्षीय फलदार एवं औषधीय वृक्ष विद्यमान थे। इन वृक्षों को बिना किसी वैधानिक अनुमति के भारी मशीनों के माध्यम से जड़ से उखाड़ा जा रहा है।

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विश्वस्त सूत्रों का दावा है कि अब तक 10 से 15 से अधिक वृक्ष पूरी तरह नष्ट किए जा चुके हैं, जबकि कटाई का कार्य अभी भी जारी है। हैरानी की बात यह है कि इस संबंध में न तो वन विभाग से अनुमति ली गई है और न ही राजस्व विभाग से किसी प्रकार की वैधानिक स्वीकृति प्राप्त की गई है।

प्रशासनिक उदासीनता पर गंभीर प्रश्न

सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि खुलेआम भारी मशीनों से वृक्ष उखाड़े जाने के बावजूद अब तक कोई भी जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी या विभागीय अमला मौके पर निरीक्षण के लिए नहीं पहुँचा, जिससे विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो रहे हैं। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि अवैध वृक्ष कटाई की सूचना संबंधित विभागों को दी गई थी, इसके बावजूद न तो स्थल निरीक्षण किया गया और न ही कटाई पर कोई रोक लगाई गई। इससे यह आशंका और गहराती जा रही है कि कहीं इस अवैध गतिविधि को अप्रत्यक्ष संरक्षण तो नहीं मिल रहा।

कानून का खुला उल्लंघन

यह मामला केवल वृक्ष कटाई तक सीमित नहीं है, बल्कि छत्तीसगढ़ वृक्ष संरक्षण अधिनियम, पर्यावरण संरक्षण अधिनियम एवं राजस्व नियमों के प्रत्यक्ष उल्लंघन से जुड़ा हुआ है।
विशेषज्ञों के अनुसार इस प्रकार की अवैध कटाई से भू-जल स्तर में गिरावट, स्थानीय तापमान में वृद्धि, जैव विविधता को नुकसान तथा पर्यावरणीय संतुलन पर दीर्घकालिक प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

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