
सड़क निर्माण में अनियमितता के आरोप, छाल मुख्य मार्ग से बन रहे – तिलाईपाली – पंडरीपानी निर्माणधीन मार्ग की गुणवत्ता को लेकर उठे सवाल ?
शासन – प्रशासन पर गंभीर आरोप – स्थानीय पंचायत के नेताओं द्वारा क्षेत्र के बड़े जन प्रतिनिधि व सत्तारूढ़ नेताओं के साथ जिम्मेदार विभागीय जिला अधिकारी पर सांठ – गांठ कर लेन-देन का लगा रहे आरोप ? पर निर्माण कार्य में भारी भ्रष्टाचार होने का लिखित शिकायत पत्र दिखाकर दावा..?? उच्च अधिकारियों से शिकायत के बाद भी जांच में खानापूर्ति करते हुए ठेकेदार पर मेहरबान नेता व अफसर.. करोड़ों रुपए में बनने वाला सड़क एक पानी में बह जायेगी.. सड़क की लिखित गारेंटी लें जिम्मेदार अधिकारी.. ग्रामीण।।
रायगढ़|घरघोड़ा|2026/10/जून|न्यूज डेस्क|प्रधान संपादक
मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना (MMGSY) के अंतर्गत छाल मुख्यमार्ग रोड से तिलाईपाली–पंडरीपानी स्कूल तक 05.05 किमी निर्माणाधीन सीसी सड़क व डामरीकरण की गुणवत्ता को लेकर क्षेत्र में विवाद गहराता जा रहा है। स्थानीय ग्रामीणों ने निर्माण कार्य में आरोपित कर तकनीकी मानकों की अनदेखी तथा निम्न गुणवत्ता की सामग्री उपयोग किए जाने का आरोप लगाते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
भारत सरकार की महत्वाकांक्षी योजना के तहत ग्रामीण सड़क विकास की करोड़ों रुपए की बनने वाली इस सड़क पर अधिकारी व ठेकेदार की मिलीभगत से लाखों रूपए का भ्रष्टाचार होने की जानकारी मिल रही है, सूत्र बताते हैं स्थानीय ग्रामीण नेताओं ने इस निर्माणाधीन सड़क में घटिया क्वालिटी को लेकर लगातार शिकायतें किया जिसपर जांच के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति किये जाने का आरोप लगाया जा रहा है, स्थानीय जनप्रतिनिधि ने नाम सार्वजनिक ना करने की शर्त पर बताया कि शिकायत होने के बाद स्थानीय उच्च अधिकारियों ने उसके उपर दबाव बनाने का प्रयास किया यहां तक कि जेल भेजने की धमकी मिलने लगा, ठेकेदार विभागीय अधिकारियों के साथ मिलकर स्थानीय बड़े नेताओं व जनप्रतिनिधि को पैसे देने की बात कर मुझे व गांव वालों को जो करना है कर लो कह सबको खरीद लिया हुं कुछ बिगाड़ नहीं सकते कहते हुए अपनी ठेकेदारी रोब दिखाने लगा, जिससे जाहिर होता है सड़क निर्माण में भारी अनियमिताएं व भ्रष्टाचार होने की संभावनाएं हैं
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण के दौरान कई स्थानों पर यह तर्क दिया जा रहा है कि नीचे पुरानी सड़क मौजूद होने के कारण सीसी सड़क की मोटाई निर्धारित मानकों से कम रखी जा रही है। उनका आरोप है कि कुछ हिस्सों में सड़क की मोटाई लगभग 4 इंच तक सीमित कर दी गई है, जिससे सड़क की मजबूती और दीर्घकालिक उपयोगिता प्रभावित हो सकती है।
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सामग्री की गुणवत्ता पर भी सवाल ?
स्थानीय नागरिकों के अनुसार निर्माण कार्य में प्रयुक्त गिट्टी, फाइन एग्रीगेट (मुरूम) तथा अन्य निर्माण सामग्री का अनुपात भी निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं दिखाई दे रहा है। ग्रामीणों का दावा है कि छोटी गिट्टी का उपयोग अपेक्षित मात्रा में नहीं किया जा रहा, जिससे सड़क की गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
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नई सड़क में दिखाई दे रही दरारें
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि निर्माणाधीन अथवा हाल ही में निर्मित सड़क के कुछ हिस्सों में प्रारंभिक स्तर पर ही दरारें दिखाई देने लगी हैं। उनका कहना है कि यह स्थिति निर्माण कार्य की गुणवत्ता और निरीक्षण व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े करती है।
तकनीकी जांच की आवश्यकता
निर्माण क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि सड़क निर्माण में स्वीकृत डिजाइन, निर्धारित मोटाई, गुणवत्तापूर्ण सामग्री तथा उचित कम्पेक्शन का पालन अनिवार्य होता है। यदि इनमें किसी प्रकार की कमी पाई जाती है तो सड़क की आयु कम हो सकती है तथा भविष्य में मरम्मत पर अतिरिक्त व्यय का बोझ बढ़ सकता है।
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ग्रामीणों की मांग
ग्रामीणों ने संबंधित विभाग, जिला प्रशासन एवं गुणवत्ता नियंत्रण एजेंसियों से निर्माण कार्य की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषी अधिकारियों एवं संबंधित एजेंसी के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि सरकारी धन का सदुपयोग सुनिश्चित हो सके और क्षेत्रवासियों को गुणवत्तापूर्ण सड़क सुविधा प्राप्त हो।
हालांकि, समाचार लिखे जाने तक संबंधित विभाग या निर्माण एजेंसी की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हो सकी है।










