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तिलाईपल्ली एनटीपीसी खुले गड्ढे, पानी का भराव और भारी मशीनों की आवाजाही के बीच हादसे का खतरा – जिम्मेदारों की निगरानी पर उठे सवाल –

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बीटीएल कंपनी द्वारा किया जा रहा निर्माण कार्य में लापरवाही उजागर – दुर्घटनाओं को आमंत्रण देता निर्माणाधीन भवन।

घरघोड़ा/तलईपाली/बबलू मोटवानी_वरिष्ठ पत्रकार 
रायगढ़ जिले के घरघोड़ा क्षेत्र में संचालित तलईपाली कोल माइनिंग परियोजना एक बार फिर चर्चा में है। इस बार मामला सीधे तौर पर श्रमिकों की सुरक्षा और निर्माण कार्य की गुणवत्ता से जुड़ा है।
परियोजना में चल रहे सिविल निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों की कथित अनदेखी किए जाने के गंभीर आरोप सामने आए हैं। स्थानीय ग्रामीणों एवं परियोजना में कार्यरत श्रमिकों का दावा है कि निर्माण कार्य के दौरान कई स्थानों पर गहरे गड्ढे खोदकर उन्हें खुले में छोड़ दिया गया है।
सबसे गंभीर स्थिति यह बताई जा रही है कि कई गड्ढों में बारिश का पानी भर गया है, जिससे उनकी वास्तविक गहराई दिखाई नहीं देती। इसके बावजूद कथित रूप से कई स्थानों पर पर्याप्त बैरिकेडिंग और चेतावनी संकेत नजर नहीं आ रहे हैं।
बड़ा सवाल-अगर हादसा हुआ तो जिम्मेदार कौन?
जब किसी बड़े औद्योगिक एवं खनन परियोजना क्षेत्र में भारी मशीनरी लगातार चल रही हो, वहां खुले और पानी से भरे गड्ढे दुर्घटना का बड़ा कारण बन सकते हैं।
स्थानीय लोगों का सवाल है –
क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जा रहा है?
यदि कार्यस्थल पर सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त है तो खुले गड्ढों के चारों ओर मजबूत बैरिकेडिंग क्यों नहीं?
यदि चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं तो खतरनाक स्थानों पर उनकी पर्याप्त मौजूदगी क्यों नहीं दिखाई दे रही?
BTL को कार्य, KCPL पर सिविल कार्य कराने की जानकारी
प्राप्त जानकारी के अनुसार परियोजना का कार्य BTL Pvt. Ltd. को आवंटित है, जबकि सिविल निर्माण कार्य KCPL द्वारा सब-कॉन्ट्रैक्ट के माध्यम से किए जाने की जानकारी सामने आई है।
स्थानीय स्तर पर आरोप लगाया जा रहा है कि निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों और गुणवत्ता संबंधी निर्धारित प्रक्रियाओं का पर्याप्त पालन नहीं किया जा रहा है।
हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र एवं आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। मामले की वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
 खुले गड्ढे और भारी मशीनरी-खतरे का दोहरा कारण
परियोजना क्षेत्र में भारी वाहनों एवं मशीनों की लगातार आवाजाही होती है। दूसरी ओर कई स्थानों पर गहरे गड्ढे और पानी भराव होने की बात सामने आ रही है।
ऐसी स्थिति में-
  • श्रमिकों के गड्ढे में गिरने का खतरा।
  • भारी वाहन के दुर्घटनाग्रस्त होने की आशंका।
  • रात के समय दृश्यता कम होने से जोखिम बढ़ने की संभावना।
  • पानी से भरे गड्ढों की गहराई का अंदाजा नहीं लगना।
  • आसपास रहने वाले ग्रामीणों के लिए दुर्घटना का खतरा।
  • जैसी चिंताएं सामने आ रही हैं।
  •  मौखिक शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं होने का आरोप
श्रमिकों एवं स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि सुरक्षा से जुड़ी समस्याओं की जानकारी संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों एवं परियोजना प्रबंधन को मौखिक रूप से दी गई है।
इसके बावजूद यदि सुरक्षा व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया है तो यह सवाल गंभीर है कि परियोजना क्षेत्र में सुरक्षा निरीक्षण और मॉनिटरिंग किस स्तर पर की जा रही है।
 निर्माण सामग्री की गुणवत्ता पर भी सवाल
मामले में निर्माण कार्य में इस्तेमाल किए जा रहे मटेरियल की गुणवत्ता को लेकर भी स्थानीय स्तर पर आरोप लगाए जा रहे हैं।
KCPL द्वारा कथित रूप से घटिया गुणवत्ता के मटेरियल का उपयोग किए जाने की शिकायत की बात सामने आई है।
यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं तो मामला केवल गुणवत्ता तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि निर्माण की मजबूती और भविष्य में परियोजना की सुरक्षा से भी जुड़ जाएगा।
इसलिए निर्माण सामग्री के तकनीकी परीक्षण और गुणवत्ता जांच की मांग उठ रही है।
🔴DGMS से जांच की तैयारी
मामले की गंभीरता को देखते हुए महानिदेशालय खान सुरक्षा (DGMS) एवं संबंधित परियोजना अधिकारियों को शिकायत भेजने की तैयारी की जा रही है।
शिकायत में मांग की जाएगी कि पूरे निर्माण क्षेत्र का तत्काल निरीक्षण किया जाए और सुरक्षा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति की जांच की जाए।
🔴 शिकायत में प्रमुख मांगें
1. सभी खुले गड्ढों की तत्काल पहचान कर मजबूत बैरिकेडिंग की जाए।
2. पानी से भरे गड्ढों को तत्काल सुरक्षित किया जाए।
3. सभी खतरनाक स्थानों पर स्पष्ट चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं।
4. रात में पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
5. श्रमिकों को निर्धारित सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए जाएं।
6. भारी मशीनों एवं वाहनों की आवाजाही के लिए सुरक्षित मार्ग निर्धारित किया जाए।
7. निर्माण कार्य में उपयोग किए जा रहे मटेरियल की गुणवत्ता की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराई जाए।
8. BTL एवं सब-कॉन्ट्रैक्टर द्वारा सुरक्षा नियमों के पालन की जांच की जाए।
9. सुरक्षा नियमों में लापरवाही पाए जाने पर जिम्मेदारों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
10. भविष्य में दुर्घटना रोकने के लिए नियमित सुरक्षा ऑडिट कराया जाए।
⚠️सवाल बड़ा है-सुरक्षा पहले या हादसे के बाद कार्रवाई?
तलईपाली कोल माइनिंग परियोजना में बड़ी संख्या में श्रमिक और कर्मचारी कार्यरत हैं। भारी मशीनरी और निर्माण गतिविधियों के बीच सुरक्षा व्यवस्था से किसी भी प्रकार का समझौता गंभीर परिणाम दे सकता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन और परियोजना प्रबंधन को किसी दुर्घटना के बाद जांच और कार्रवाई करने के बजाय पहले से ही संभावित खतरे को खत्म करना चाहिए।
क्योंकि हादसा होने के बाद मुआवजा और जांच से उस जान की भरपाई नहीं हो सकती, जो सुरक्षा में लापरवाही के कारण चली जाए।
अब देखने वाली बात होगी कि DGMS, संबंधित विभाग और परियोजना प्रबंधन इन आरोपों को कितनी गंभीरता से लेते हैं और क्या कार्यस्थल का तत्काल निरीक्षण कर सुरक्षा व्यवस्था को दुरुस्त कराया जाता है।
*प्रबंधन का पक्ष जरूरी*
BTL Pvt. Ltd., KCPL और परियोजना प्रबंधन का आधिकारिक पक्ष इस मामले में महत्वपूर्ण है। यदि कंपनी द्वारा सभी सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा है, तो प्रबंधन को अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए सुरक्षा व्यवस्था की जानकारी सामने रखनी चाहिए।
फिलहाल मामला जांच का विषय है और आरोपों की पुष्टि संबंधित विभाग की जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
  • अब आरोपों के बाद एनटीपीसी प्रंबधन एवं जिम्मेदार प्रशासनिक तंत्र मामले में संज्ञान लेकर कार्रवाई करती है या ठंठे बस्ते पर डाल देती है।

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