
अक्षर-अक्षर ज्ञान सिखाते,सपनों को आकार दिलाते।गिरने पर फिर हाथ बढ़ाकर,हिम्मत से आगे बढ़वाते।
शिक्षक विजय पंडा द्वारा चलाए जा रहे 1 % वेतन छात्राओं के सुनहरे भविष्य के लिए जिला में बना प्रेरणा का केन्द्र।।
घरघोड़ा/खबर डेस्क/24/07/2026/Ajeet Dansena
शिक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव लाने और ग्रामीण व कस्बाई क्षेत्र की छात्राओं को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से शासकीय कन्या माध्यमिक शाला, घरघोड़ा के शिक्षक विजय पंडा द्वारा शुरू किया गया “मासिक वेतन का 1 प्रतिशत अभियान” आज प्रेरणा का उदाहरण बन गया है। इस अभियान के तहत प्रतियोगी एवं वार्षिक परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली छात्राओं को सम्मानित कर उनका उत्साहवर्धन किया गया।
प्रयास विद्यालय में चयनित बेटियों का बढ़ाया हौसला
कार्यक्रम में प्रतिष्ठित प्रयास आवासीय विद्यालय में चयनित छात्राओं तथा कक्षा 8वीं की वार्षिक परीक्षा में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाली मेधावी छात्राओं को विशेष रूप से सम्मानित किया गया।
कक्षा 8वीं की मेधावी छात्राएं:
1. आँचल भोय (प्रथम) 2. अनामिका महंत (द्वितीय)3. मुस्कान कुम्हार (तृतीय)
प्रयास आवासीय विद्यालय में चयनित छात्राएं:
1.आँचल भोय 2. रवीना जोल्हे 3.जश्मिता पंडा 4.गायत्री मांझी
1% वेतन से खरीदे उपहार, बेटियों के चेहरे पर आई मुस्कान ..
शिक्षक विजय पंडा ने अपने मासिक वेतन के 1% अंशदान से खरीदी गई उपयोगी शैक्षणिक सामग्री एवं रंग-बिरंगी छतरियां छात्राओं को भेंट कीं। सम्मान पाकर छात्राओं के चेहरों पर खुशी साफ दिखाई दी और उन्होंने आगे भी बेहतर प्रदर्शन का संकल्प लिया।
“हर शिक्षक 1% वेतन बच्चों पर खर्च करे”
इस अवसर पर विजय पंडा ने सभी शिक्षकों से अपील करते हुए कहा—
“यदि प्रत्येक शिक्षक अपने मासिक वेतन का सिर्फ 1 प्रतिशत हिस्सा बच्चों के प्रोत्साहन और उनकी शैक्षणिक आवश्यकताओं पर खर्च करने का संकल्प ले, तो सरकारी स्कूलों में पढ़ाई का माहौल और भी बेहतर होगा। कोई भी मेधावी बच्चा संसाधनों के अभाव में पीछे नहीं रहेगा।”
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गुरुजनों ने दी शुभकामनाएं
कार्यक्रम में व्याख्याता संतराम साहू एवं शिक्षिका सावित्री पटेल ने भी सफल छात्राओं को बधाई देते हुए उन्हें उच्च शिक्षा और उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रेरित किया।
अनुकरणीय पहल की हो रही सराहना
शिक्षक विजय पंडा के इस “मासिक वेतन का 1 प्रतिशत अभियान” की स्थानीय नागरिकों, अभिभावकों और शिक्षा जगत से जुड़े लोगों ने मुक्तकंठ से सराहना की। लोगों का कहना है कि यदि ऐसे प्रयास व्यापक स्तर पर अपनाए जाएं, तो सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता और विद्यार्थियों का मनोबल दोनों नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकते हैं।


वेतन का 1% बना बेटियों







