
🔥 कलेक्टर मंयक चतुर्वेदी ने तंबाकू निषेध कार्यक्रम को लेकर सख्त निर्देश दिए _ धरातल पर कार्रवाई शुन्य।
🔥 पूर्व खबर प्रकाशित में हमने तंबाकू निषेध कार्यक्रम को कागज़ पर उकेरी बेरंग स्याही बताया था, हर साल जिम्मेदारी तय होती है उन्हीं अधिकारी के कार्यालय के सामने जर्दा सिगरेट खुलेआम बिकता है, सुप्रीम कोर्ट के गाइड़ लाइन व कानून होने के बाद भी सिस्टम का बुरा हाल है।
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घरघोड़ा।
रायगढ़ जिले को तंबाकू मुक्त बनाने के लिए कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी के सख्त निर्देशों के बावजूद घरघोड़ा नगर में हालात कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं। मुख्य चौक-चौराहों, सरकारी कार्यालयों, स्कूलों और सार्वजनिक स्थलों के आसपास खुलेआम जर्दा, गुटखा और सिगरेट की बिक्री हो रही है, पीएमश्री आत्मानंद इंग्लिश मिडियम विद्यालय नवापारा स्कूल परिसर से लगा दुकानों में सिगरेट पीते बच्चों के भविष्य की चिंतन करना आवश्यक वहीं कन्या शाला, सरस्वती शिशु मंदिर, प्रज्ञा विद्यापीठ स्कूल के प्रबंधकों की जायज़ चिंता को अधिकारीयों को दूर करना चाहिए तब जाकर धरातल पर तंबाकू निषेध कार्यक्रम दिखाई देगा।
सवाल यह है कि जब कलेक्टर के निर्देश स्पष्ट हैं, तो जिम्मेदार विभाग कार्रवाई से आखिर क्यों कतरा रहे हैं?
कागजों में अभियान, जमीन पर बेअसर
जिला प्रशासन की बैठकों में नशा मुक्ति और तंबाकू नियंत्रण अभियान को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं। स्वास्थ्य, शिक्षा, खाद्य एवं औषधि प्रशासन और पुलिस विभाग को संयुक्त कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए, लेकिन घरघोड़ा में इन आदेशों का असर कहीं दिखाई नहीं देता। प्रतिबंधित क्षेत्रों में तंबाकू उत्पादों की बिक्री लगातार जारी है।
स्कूलों के आसपास सबसे गंभीर स्थिति
घरघोड़ा के कई शैक्षणिक संस्थानों के आसपास नियमों की खुलेआम अनदेखी हो रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ दुकानों पर छात्र आसानी से सिगरेट और तंबाकू उत्पाद खरीदते देखे जाते हैं। यदि यह स्थिति बनी रही तो नशे की लत कम उम्र के विद्यार्थियों तक पहुंचने का खतरा और बढ़ सकता है।
कानून क्या कहता है?
सिगरेट एवं अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम (COTPA), 2003 के अनुसार—
सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान प्रतिबंधित है।
18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को तंबाकू बेचना अपराध है।
स्कूल, कॉलेज और अन्य शैक्षणिक संस्थानों के 100 गज के दायरे में तंबाकू उत्पादों की बिक्री प्रतिबंधित है।
उल्लंघन करने वालों पर जुर्माना और कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है।
कार्रवाई किसकी जिम्मेदारी?
पुलिस विभाग, स्वास्थ्य विभाग, खाद्य एवं औषधि प्रशासन तथा नगर पंचायत पर कानून लागू कराने की जिम्मेदारी है। नियमित निरीक्षण और कार्रवाई से इस पर रोक लगाई जा सकती है, लेकिन स्थानीय स्तर पर ऐसी कार्रवाई बहुत कम दिखाई देती है।
शराब भट्टी और बढ़ती अव्यवस्था
नगर के मुख्य मार्ग पर संचालित शासकीय शराब दुकान भी आम लोगों की परेशानी का कारण बन रही है। राहगीरों, महिलाओं और स्कूली बच्चों को असुविधा का सामना करना पड़ता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि शराब और तंबाकू की आसान उपलब्धता से युवाओं पर गलत प्रभाव पड़ रहा है।
जनता पूछ रही है…
क्या कलेक्टर के आदेश सिर्फ बैठकों तक सीमित रह जाएंगे?
प्रतिबंधित क्षेत्रों में खुलेआम बिक्री के लिए जिम्मेदार कौन है?
क्या संबंधित विभाग कभी संयुक्त अभियान चलाकर प्रभावी कार्रवाई करेंगे?
क्या घरघोड़ा वास्तव में तंबाकू मुक्त बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है या यह सिर्फ सरकारी दावों तक सीमित है?
तंबाकू निषेध और नशा मुक्ति अभियान तभी सफल होंगे, जब नियमों का पालन केवल कागजों पर नहीं बल्कि सड़कों पर भी दिखाई देगा। यदि जिम्मेदार विभाग समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं करते, तो तंबाकू मुक्त जिला बनाने का उद्देश्य केवल एक सरकारी नारा बनकर रह जाएगा।









