•वीसा पावर की जमीन पर 1600 मेगावाट परियोजना का रास्ता साफ, डोंगीतराई से साराडीह तक बढ़ेंगी औद्योगिक गतिविधियां
खबर डेक्स / घरघोड़ा – रायगढ़ /
रायगढ़। रायगढ़ जिले में एक और बड़े पावर प्रोजेक्ट की नींव पड़ने जा रही है। गुजरात की टोरेंट पावर कंपनी ने दिवालिया हो चुकी वीसा पावर की संपत्तियां खरीदने के बाद जिले में 1600 मेगावाट क्षमता का पावर प्लांट स्थापित करने की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाया है। पर्यावरण एवं वन मंत्रालय की एक्सपर्ट एप्रेजल कमेटी ने परियोजना के लिए टर्म्स ऑफ रेफरेंस (TOR) जारी करने की सिफारिश की है। इसके साथ ही पर्यावरणीय स्वीकृतियों की प्रक्रिया आगे बढ़ने का रास्ता खुल गया है।
प्रस्तावित परियोजना में 800-800 मेगावाट की दो इकाइयां स्थापित की जाएंगी। कंपनी के अनुसार परियोजना पर लगभग 22 हजार करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। करीब 312 हेक्टेयर भूमि पर प्लांट विकसित किया जाएगा।
वीसा पावर के अधूरे प्रोजेक्ट की जगह अब टोरेंट पावर
देवरी और डूमरपाली क्षेत्र में कभी वीसा पावर ने 1200 मेगावाट पावर प्लांट की योजना शुरू की थी। वर्ष 2005 में छत्तीसगढ़ शासन के साथ एमओयू के बाद परियोजना पर काम भी शुरू हुआ, लेकिन कंपनी के वित्तीय संकट और बाद में दिवालिया प्रक्रिया के कारण वर्ष 2014 के आसपास निर्माण कार्य ठप हो गया।
एनसीएलटी की प्रक्रिया में संपत्तियों की नीलामी हुई। इसी दौरान टोरेंट पावर ने वीसा पावर की करीब 686 एकड़ भूमि एवं संबंधित संपत्तियों को लगभग 310 करोड़ रुपये की बोली लगाकर हासिल किया। इसके अलावा आसपास के क्षेत्रों में कंपनी द्वारा खरीदी गई अन्य जमीन भी परियोजना के दायरे में बताई गई है।
•इन गांवों में बढ़ेंगी औद्योगिक गतिविधियां
प्रस्तावित पावर प्लांट के प्रभाव क्षेत्र में डोंगीतराई, किरीतमाल, पंडरीपानी, कोड़तराई, चारभाटा, लेबड़ा, डोंगाढकेल, काशीचुआं और साराडीह समेत आसपास के क्षेत्र शामिल हैं। प्लांट के दो किलोमीटर के दायरे में कई गांव आने की बात सामने आई है।
रायगढ़ पहले से ही कोयला, बिजली, स्टील और अन्य बड़े उद्योगों का प्रमुख केंद्र है। ऐसे में टोरेंट पावर की यह परियोजना जिले के औद्योगिक परिदृश्य को और बड़ा रूप दे सकती है। निवेश के साथ रोजगार, परिवहन, व्यापार और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि की उम्मीद है।
•रोजाना 72 हजार घन मीटर से ज्यादा पानी की जरूरत
परियोजना का सबसे बड़ा सवाल जल संसाधन और पर्यावरणीय प्रभाव को लेकर भी रहेगा। प्रस्ताव के अनुसार प्लांट में प्रतिदिन करीब 72,456 घन मीटर पानी की आवश्यकता होगी। इसके लिए महानदी पर बने साराडीह बैराज से पानी लेने की योजना बताई गई है। राज्य शासन की ओर से पानी उपलब्ध कराने की अनुमति भी दी जा चुकी है।
पावर प्लांट को सालाना लगभग 8.2 मिलियन टन कोयले की आवश्यकता होगी, जिसे कमर्शियल कोल माइंस से लेने की योजना है। इसके साथ ही लगभग 48 हेक्टेयर क्षेत्र में एश डाइक और करीब 74 हेक्टेयर में ग्रीन बेल्ट विकसित करने का प्रस्ताव है।
•विकास के साथ जल-जंगल-जमीन की चिंता भी
रायगढ़ जिले में लगातार बढ़ते औद्योगिकीकरण ने रोजगार और आर्थिक गतिविधियों के नए अवसर पैदा किए हैं, लेकिन इसके साथ कृषि भूमि, जल स्रोत, पर्यावरण और ग्रामीण जीवन पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर सवाल भी लगातार उठते रहे हैं।
टोरेंट पावर परियोजना : के सामने भी यही चुनौती होगी कि बड़े निवेश और ऊर्जा उत्पादन के साथ स्थानीय किसानों, ग्रामीणों और पर्यावरणीय संसाधनों के हितों का संतुलन कैसे बनाया जाए। खासकर महानदी से प्रतिदिन बड़ी मात्रा में पानी उठाने और प्रतिवर्ष लाखों टन कोयले के उपयोग से जुड़े पर्यावरणीय प्रभावों पर आगामी पर्यावरणीय जनसुनवाई और स्वीकृति प्रक्रिया में गंभीर चर्चा अपेक्षित होगी।
रायगढ़ के लिए यह परियोजना केवल 22 हजार करोड़ रुपये के निवेश का आंकड़ा नहीं है। यह जिले के औद्योगिक भविष्य, रोजगार की संभावनाओं और दूसरी ओर जल-जंगल-जमीन के संरक्षण के बीच संतुलन की बड़ी परीक्षा भी साबित हो सकती है।










