0कांग्रेस विधायक लालजीत राठिया का गृह क्षेत्र छाल – आरोपी विधायक के माने जाते ख़ास
0छाल क्षेत्र अवैध कोयले के खेल के नाम से बदनाम – वर्चस्व की लड़ाई में होती है दबंगई
0वाहन सुरक्षा के नाम पर प्रति वाहन ₹700 वसूली का आरोप, धमकी देने की भी शिकायत
0एसईसीएल प्रबंधन पर बड़ा सवाल :- बिना परमिशन या जानकारी के खदान परिसर में अवैध वसूली कैसे?
घरघोड़ा/छाल/खबर डेस्क
एसईसीएल छाल खदान क्षेत्र में संचालित ठेका कंपनी के वाहन चालकों से कथित तौर पर अवैध वसूली किए जाने का मामला सामने आया है। छाल पुलिस ने शिकायत के आधार पर धरमजयगढ़ क्षेत्र के कांग्रेस विधायक प्रतिनिधि सहित 12 नामजद लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 308(2) एवं 3(5) के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
मामला आर.के.एस. ठेका कंपनी, लात (छाल) से जुड़ा बताया गया है। पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार, वाहन चालकों से “मजदूर एकता सेवा समिति संगठन” के नाम पर सुरक्षा की गारंटी देने के एवज में कथित रूप से प्रति वाहन/चालक ₹700 प्रतिमाह की राशि वसूली जाती थी। आरोप है कि राशि नकद के अलावा PhonePe के माध्यम से भी ली जाती थी।
0नौकरी से हटाने की धमकी का आरोप
शिकायतकर्ता बाबुदास महंत, निवासी ग्राम फगुरम, थाना डभरा, ने आरोप लगाया है कि यदि चालक निर्धारित राशि नहीं देता था तो उसे कथित रूप से डराया-धमकाया जाता था। शिकायत में नौकरी से निकलवाने तथा संगठन से बाहर करने की धमकी देने का भी उल्लेख किया गया है।
शिकायतकर्ता के मुताबिक यह सिलसिला 18 नवंबर 2023 से 1 जून 2026 तक चलता रहा। आरोप यह भी है कि चालकों से वसूली गई राशि उनके किसी कल्याणकारी कार्य में खर्च नहीं की गई, बल्कि निजी उपयोग में रखी गई।
छाल पुलिस द्वारा दर्ज FIR में निम्न 12 लोगों को नामजद किया गया है :-
1. अजय सिंह ठाकुर 2. बलिन्द्र सिंह 3. बोधन चौहान 4. रामकुमार जांगड़े 5. पुस पाल दास महंत 6. संजय पटेल 7. देवेन्द्र कर्ष 8. चुरामणी राठिया 9. रितुराज सिंह 10. दुर्गा डनसेना 11. नरेन्द्र निषाद 12. घनश्याम डनसेना
FIR क्रमांक 0143/2026 के अनुसार मामला 20 जून 2026 को दोपहर 2:23 बजे दर्ज किया गया। पुलिस ने BNS की धारा 308(2) एवं 3(5) के तहत अपराध पंजीबद्ध किया है।
0शिकायत और जांच के बाद FIR
बताया गया है कि इस मामले को लेकर तहसीलदार छाल तथा जनदर्शन में शिकायत की गई थी। शिकायत के बाद हुई जांच एवं प्राप्त प्रतिवेदन के आधार पर प्रथम दृष्टया अपराध पाए जाने पर छाल पुलिस ने मामला दर्ज किया।
CISF की सुरक्षा के बावजूद खदान में कथित अवैध वसूली, SECL प्रबंधन की निगरानी पर सवाल
SECL की खदानों की सुरक्षा के लिए CISF की तैनाती रहती है। ऐसे में यदि ठेका कंपनी के वाहन चालकों से लंबे समय तक सुरक्षा के नाम पर कथित रूप से प्रति वाहन ₹700 की वसूली होती रही, तो सबसे बड़ा सवाल SECL प्रबंधन की निगरानी व्यवस्था पर खड़ा होता है।
क्या प्रबंधन को इसकी भनक तक नहीं लगी? यदि वाहन चालकों से खुले तौर पर राशि वसूली जा रही थी और इसके लिए कथित तौर पर संगठन के नाम का इस्तेमाल किया जा रहा था, तो खदान परिसर में सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी तंत्र आखिर कितना प्रभावी था?
CISF की मौजूदगी के बावजूद यदि कोई बाहरी संगठन या व्यक्ति खदान से जुड़े वाहनों और चालकों पर कथित दबाव बनाकर वसूली करता रहा, तो इसकी जिम्मेदारी तय कौन करेगा? क्या SECL प्रबंधन ने कभी ठेका कंपनी के वाहन चालकों से इस तरह की वसूली अथवा दबाव की शिकायतों की जानकारी ली?
सबसे अहम सवाल यह भी है कि यदि यह वसूली लंबे समय से चल रही थी, तो SECL प्रबंधन और सुरक्षा एजेंसियों की नजर इस पर क्यों नहीं पड़ी?
अब FIR दर्ज होने के बाद केवल आरोपियों पर कार्रवाई ही नहीं, बल्कि यह भी जांच का विषय होना चाहिए कि खदान के भीतर या उससे जुड़े परिवहन तंत्र में कथित अवैध वसूली का नेटवर्क इतने लंबे समय तक कैसे चलता रहा और जिम्मेदार निगरानी तंत्र ने क्या कार्रवाई की ?
फिलहाल पुलिस ने प्रकरण में जांच शुरू कर दी है। शिकायत में लगाए गए आरोपों की वास्तविकता, कथित वसूली की राशि, PhonePe लेन-देन तथा संगठन की भूमिका सहित अन्य पहलुओं की जांच के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
तमाम आरोप प्रत्यारोप में पुलिस जांच के बाद ही पुष्टि अथवा खंडन हो सकेगा।











