घरघोड़ा नगर में चोरों का आतंक : पूर्व में हुए चोरियां अब भी अनसुलझे ; लगातार चोरियों से जनाक्रोश
घरघोड़ा/रायगढ़। घरघोड़ा थाना क्षेत्र में लगातार हो रही चोरी की घटनाओं ने पुलिस की रात्रि गश्त और कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। महज करीब 36 घंटे के भीतर नगर के मुख्य मार्ग और जयस्तंभ चौक के आसपास चार दुकानों में सेंधमारी की घटना सामने आने से व्यापारियों और आम नागरिकों में दहशत का माहौल है। सबसे गंभीर सवाल यह है कि थाना और तहसील कार्यालय के आसपास के क्षेत्र में भी चोर बेखौफ होकर वारदात को अंजाम देकर निकल गए।
जानकारी के अनुसार, चोरों ने संतोष किराना स्टोर और गोकुलचंद मामराज राशन दुकान को निशाना बनाया। बताया जा रहा है कि संतोष किराना स्टोर में छत फाड़कर चोर अंदर दाखिल हुए और करीब चार लाख रुपये नगद, चांदी के सिक्के, सोने के जेवरात, मोबाइल सहित अन्य सामान चोरी कर ले गए। वहीं गोकुलचंद मामराज राशन दुकान से भी एक लाख रुपये से अधिक नगदी और बड़ी मात्रा में सामान चोरी होने की जानकारी सामने आ रही है। अन्य दो दुकानों में भी चोरी की घटनाओं ने पुलिस की गश्त व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
थाने के आसपास ही चोरों का आतंक, आखिर रात्रि गश्त कहां थी ?
घरघोड़ा नगर का मुख्य तिहारा मार्ग और जयस्तंभ चौक आमतौर पर रात में भी आवाजाही वाला क्षेत्र माना जाता है। इसी इलाके में लगातार दुकानों के ताले टूटना पुलिस की रात्रि गश्त व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब नगर के मुख्य बाजार और थाना क्षेत्र के आसपास स्थित प्रतिष्ठान ही सुरक्षित नहीं हैं, तो दूर-दराज के मोहल्लों और घरों की सुरक्षा को लेकर चिंता होना स्वाभाविक है। व्यापारियों में भी अब यह सवाल उठ रहा है कि पुलिस की मौजूदगी और नियमित गश्त के बावजूद चोरों के हौसले इतने बुलंद कैसे हैं?
सीसीटीवी व्यवस्था पर भी उठे सवाल
घरघोड़ा नगर में सीसीटीवी कैमरों की स्थिति को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। यदि प्रमुख चौक-चौराहों और बाजार क्षेत्रों में लगे कैमरे प्रभावी रूप से काम नहीं कर रहे हैं, तो अपराध के बाद आरोपियों की पहचान करना पुलिस के लिए चुनौती बन जाता है।
स्थानीय स्तर पर पहले भी यह सवाल उठाया गया था कि नगर के भीतर कितने सीसीटीवी कैमरे वास्तव में चालू हालत में हैं और उनकी नियमित निगरानी कौन करता है? मौजूदा चोरी की घटनाओं के बाद यह सवाल फिर चर्चा में है।वर्षों से जमे सिपाहियों की भूमिका पर भी उठ रही चर्चा
घरघोड़ा थाना क्षेत्र में कुछ पुलिसकर्मियों के लंबे समय से पदस्थ रहने को लेकर भी स्थानीय स्तर पर चर्चाएं सामने आती रही हैं स्थांतरित होने के बाद पुनः वापस घरघोड़ा थाना वापस आना वहीं वर्षों से एक ही स्थान पर जमे कुछ सिपाही अब स्थानीय व्यवस्था और कामकाज में प्रभावशाली भूमिका निभाने लगे हैं। कुछ पुलिसकर्मियों की कथित जीवनशैली और उनके रहन-सहन को लेकर भी लोग सवाल उठाते हैं।
इसी तरह थाने के भीतर आपसी मतभेद और समन्वय की कमी को लेकर भी स्थानीय स्तर पर चर्चाएं सुनने को मिलती रहती हैं। हालांकि इन चर्चाओं की वास्तविकता की पुष्टि संबंधित पुलिस अधिकारी ही कर सकते हैं।
आमजन में यह धारणा भी चर्चा का विषय बनी हुई है कि यदि किसी काम में व्यक्तिगत लाभ की संभावना न हो तो कुछ मामलों में अपेक्षित तत्परता दिखाई नहीं जाती। यह केवल स्थानीय लोगों के बीच चल रही चर्चा और धारणा है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इन आरोपों की निष्पक्ष जांच और पुलिस अधिकारियों की स्पष्ट प्रतिक्रिया जरूरी है।
गश्त के नाम पर खर्च, परिणाम पर सवाल
रात्रि गश्त के लिए पुलिस वाहनों के संचालन और ईंधन खर्च की व्यवस्था होने के बावजूद यदि मुख्य बाजार में लगातार चोरी हो रही है, तो गश्त की प्रभावशीलता की समीक्षा आवश्यक है। सवाल यह नहीं कि पुलिस के पास संसाधन हैं या नहीं, बल्कि सवाल यह है कि उपलब्ध संसाधनों का जमीनी स्तर पर कितना प्रभाव दिखाई दे रहा है?
पुलिसकर्मियों की कार्यप्रणाली, गश्त की वास्तविक स्थिति और क्षेत्र में तैनात बल की जवाबदेही की समीक्षा वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा किया जाना आवश्यक है। किसी भी पुलिसकर्मी पर व्यक्तिगत आरोप लगाने से पहले उसकी तथ्यात्मक जांच भी उतनी ही जरूरी है।
एसएसपी से सवाल : घरघोड़ा की कानून-व्यवस्था में सुधार कब ?
कानून-व्यवस्था में जीरो टॉलरेंस की नीति की बात करने वाले वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के सामने घरघोड़ा की घटनाएं एक गंभीर चुनौती के रूप में सामने आई हैं। स्थानीय जनता का सवाल है कि जिले के महत्वपूर्ण थाना क्षेत्रों में लगातार हो रही चोरी की घटनाओं को रोकने के लिए आखिर ठोस कदम कब उठाए जाएंगे?
एसएसपी शशि मोहन सिंह से जनता यह जानना चाहती है कि घरघोड़ा थाना क्षेत्र में रात्रि गश्त, सीसीटीवी निगरानी और पुलिस बल की जवाबदेही को लेकर क्या समीक्षा की जाएगी?
थाना और तहसील के बीच भी सुरक्षित नहीं दुकानें
चोरी की घटनाओं का एक और चिंताजनक पहलू यह है कि संबंधित दुकानें थाना और तहसील कार्यालय के बीच के क्षेत्र में स्थित बताई जा रही हैं। तहसील कार्यालय जैसा महत्वपूर्ण सरकारी परिसर भी रात के समय अपेक्षाकृत सुनसान रहता है। ऐसे में आसपास की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
लगातार दो रातों में चार दुकानों में सेंधमारी की घटनाएं सामान्य चोरी की घटना से आगे बढ़कर स्थानीय कानून-व्यवस्था की गंभीर परीक्षा बन गई हैं। अब पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती चोरों को पकड़ने के साथ-साथ यह भरोसा बहाल करने की है कि नगरवासी और व्यापारी अपने प्रतिष्ठानों को लेकर सुरक्षित महसूस कर सकें।
अब सवाल सिर्फ चोरी का नहीं, पुलिसिंग की प्रभावशीलता का है। आखिर थाना क्षेत्र में ही चोरों के हौसले इतने बुलंद कैसे हुए ?














