भाजपा प्रदेश कार्यालय रायपुर में मुख्यमंत्री संग अजय जामवाल व पवन साय ने सत्ता – संगठन की बैठक कर समीक्षा..ll
मुख्यमंत्री, मंत्री, विधायक और सांसदों को कार्यकर्ताओं की बात सुननी होगी : क्षेत्रीय संगठन महामंत्री..ll
भाजपा की मैराथन बैठक में सत्ता-संगठन के तालमेल की गहन समीक्षा, कार्यकर्ताओं की नाराजगी से लेकर मंत्रियों सांसद व विधायक की क्षेत्रों में सक्रियता तक पर हुआ मंथन .. विधायक – सांसद को रिपोर्ट कार्ड सुधारने का सख़्त हिदायत..ll
रायपुर। छत्तीसगढ़ भाजपा में संगठन और सरकार के बीच बेहतर समन्वय को लेकर राजधानी रायपुर स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में दो दिनों तक चली मैराथन बैठकों ने संगठन के भीतर चल रही जमीनी गतिविधियों और चुनौतियों को सामने रखा है।
बैठक में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, प्रदेश सरकार के मंत्री, सांसद, विधायक, जिला अध्यक्ष, जिला प्रभारी तथा संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल हुए। क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल और प्रदेश संगठन महामंत्री पवन साय ने अलग-अलग जिलों की स्थिति का फीडबैक लिया। पहले दिन 16 जिलों और दूसरे दिन 17 जिलों की समीक्षा की गई।
सिर्फ औपचारिक बैठक नहीं, जमीनी हकीकत जानने की कोशिश
भाजपा की ओर से इसे संगठनात्मक समीक्षा और नियमित प्रक्रिया बताया गया, लेकिन बैठक में जिस तरह जिलावार फीडबैक लिया गया, उससे स्पष्ट है कि संगठन सरकार और पार्टी के बीच जमीनी स्तर पर तालमेल की वास्तविक स्थिति जानना चाहता था।
क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल और संगठन महामंत्री पवन साय ने प्रभारी मंत्रियों के साथ वन-टू-वन चर्चा की। इसमें जिलों में संगठन की गतिविधियों, सरकार की योजनाओं के क्रियान्वयन, जनता की समस्याओं, स्थानीय संगठन की स्थिति और जनप्रतिनिधियों के साथ कार्यकर्ताओं के तालमेल जैसे विषयों पर चर्चा हुई।
कार्यकर्ताओं की शिकायतों ने बढ़ाई संगठन की चिंता
बैठक से जुड़ी रिपोर्टों में सामने आया कि कुछ जिलों के पदाधिकारियों ने प्रभारी मंत्रियों के सामने कार्यकर्ताओं की समस्याएं और शिकायतें रखीं। सूत्रों के हवाले से यह भी रिपोर्ट किया गया कि कई कार्यकर्ताओं को अधिकारियों द्वारा अपेक्षित सहयोग नहीं मिलने की शिकायत सामने आई।
कुछ स्थानों पर प्रभारी मंत्रियों के जिलों में पर्याप्त दौरे नहीं होने, जनता से जुड़े मुद्दों और बिजली बिल जैसे विषयों को लेकर भी फीडबैक सामने आया। कुछ विधायकों ने मंत्रियों को पत्र लिखने के बावजूद कार्रवाई नहीं होने की बात रखी।
यही वह बिंदु है जहां संगठन की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। भाजपा जैसे कैडर आधारित संगठन में कार्यकर्ता केवल चुनाव के समय सक्रिय रहने वाला व्यक्ति नहीं है, बल्कि वह सरकार और जनता के बीच महत्वपूर्ण कड़ी माना जाता है।
इसलिए संगठन का संदेश मूल रूप से यही माना जा सकता है कि मुख्यमंत्री, मंत्री, सांसद और विधायक कार्यकर्ताओं की बात सुनें, उनकी समस्याओं को समझें और संगठन के साथ लगातार संवाद बनाए रखें।
मंत्रियों के कामकाज का भी लिया गया हिसाब
बैठक में केवल संगठन की गतिविधियों पर चर्चा नहीं हुई, बल्कि प्रभारी मंत्रियों की जिलों में सक्रियता की भी समीक्षा की गई।
रिपोर्टों के अनुसार, करीब दो महीने पहले मुख्यमंत्री निवास में हुई बैठक में प्रभारी मंत्रियों को अपने-अपने प्रभार वाले जिलों में नियमित बैठकें करने, जनता से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता देने और संगठन के साथ समन्वय बनाए रखने के निर्देश दिए गए थे। अब संगठन ने यह जानने की कोशिश की कि इन निर्देशों के बाद जमीनी स्तर पर कितना काम हुआ।
यानी इस बैठक का एक महत्वपूर्ण पहलू ‘निर्देश से लेकर उसके क्रियान्वयन तक की समीक्षा’ भी रहा।
सत्ता और संगठन के बीच तालमेल क्यों महत्वपूर्ण?
छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकार बनने के बाद अब संगठन के सामने सबसे बड़ी चुनौती सरकार की उपलब्धियों को जमीनी स्तर तक पहुंचाने और संगठनात्मक नेटवर्क को लगातार सक्रिय बनाए रखने की है।
सरकार योजनाएं बनाती है, मंत्री विभाग चलाते हैं, विधायक अपने क्षेत्रों में जनता से जुड़े रहते हैं और सांसद केंद्र तथा राज्य के बीच भूमिका निभाते हैं। लेकिन इन सभी गतिविधियों की वास्तविक जानकारी संगठन तक पहुंचाने में जिला अध्यक्ष, मंडल पदाधिकारी और बूथ स्तर का कार्यकर्ता महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
यदि कार्यकर्ता और जनप्रतिनिधि के बीच संवाद कमजोर होता है तो उसका असर सीधे संगठन की जमीनी गतिविधियों पर पड़ सकता है।
इसीलिए बैठक में सत्ता और संगठन के बीच बेहतर तालमेल को विशेष महत्व दिया गया।
सांसद विजय बघेल का बयान भी चर्चा में
दुर्ग जिले की समीक्षा के बाद सांसद विजय बघेल ने कहा कि बैठक में सभी विषयों पर खुलकर चर्चा हुई। उन्होंने संगठन के वरिष्ठ नेताओं के सामने अपनी बात रखने को लेकर कहा कि संगठन के बड़े नेताओं के सामने मन की बात कह देने से मन भी हल्का हो जाता है।
हालांकि उन्होंने सत्ता और संगठन के बीच किसी बड़े विवाद अथवा तालमेल की कमी की चर्चाओं को खारिज किया और इसे संगठन को मजबूत करने की दिशा में हुई चर्चा बताया।
यह बयान भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे यह संकेत मिलता है कि बैठक में नेताओं और संगठन पदाधिकारियों को अपनी बात खुलकर रखने का अवसर मिला।
संगठन ने मांगा जमीनी फीडबैक
भाजपा संगठन के लिए सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि सरकार की योजनाओं और निर्णयों का जनता तथा कार्यकर्ताओं के बीच क्या प्रभाव है।
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बैठक में इसी कारण जिला स्तर पर यह जानने की कोशिश की गई कि
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– सरकार की योजनाओं का लाभ जनता तक पहुंच रहा है या नहीं?
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– जिला संगठन और प्रशासन के बीच समन्वय कैसा है?
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– कार्यकर्ताओं की समस्याओं का समाधान हो रहा है या नहीं?
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– प्रभारी मंत्री अपने जिलों में कितने सक्रिय हैं?
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– विधायक और सांसद संगठन के साथ कितना संवाद कर रहे हैं?
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– जिला अध्यक्षों और स्थानीय संगठन की बातों को कितना महत्व मिल रहा है?
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– जनता में किन मुद्दों को लेकर असंतोष या शिकायत है?
इन सवालों का जवाब संगठन के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि आगामी राजनीतिक गतिविधियों में यही जमीनी फीडबैक रणनीति तय करने में उपयोगी होगा।
कार्यकर्ता की सुनवाई’ सबसे बड़ा संदेश
इस पूरी कवायद का सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश कार्यकर्ताओं की सुनवाई है। भाजपा का संगठनात्मक ढांचा बूथ से लेकर जिला और प्रदेश स्तर तक कार्यकर्ताओं के नेटवर्क पर आधारित है। ऐसे में यदि किसी जिले का कार्यकर्ता किसी अधिकारी, जनप्रतिनिधि या मंत्री से जुड़ी समस्या लेकर संगठन तक पहुंचता है और उसकी सुनवाई नहीं होती, तो उसका असर संगठन के मनोबल पर पड़ सकता है।
इसलिए क्षेत्रीय संगठन महामंत्री की ओर से जनप्रतिनिधियों को यह संदेश कि कार्यकर्ताओं की बात सुनी जाए और उनके साथ संवाद रखा जाए, संगठन की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अधिकारियों और संगठन के बीच समन्वय भी मुद्दा
बैठक में अधिकारियों और संगठन के बीच तालमेल को लेकर भी चर्चा होने की बात सामने आई है। यह मुद्दा राजनीतिक दृष्टि से इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सरकार की योजनाओं का अंतिम क्रियान्वयन प्रशासनिक तंत्र के माध्यम से ही होता है।
यदि स्थानीय कार्यकर्ता किसी योजना या जनसमस्या को लेकर प्रशासन तक पहुंचता है और उसे अपेक्षित सहयोग नहीं मिलता, तो उसकी नाराजगी अंततः संगठन तक पहुंचती है।
यही कारण है कि संगठन अब केवल राजनीतिक कार्यक्रमों की संख्या नहीं देख रहा, बल्कि सरकार, प्रशासन, जनप्रतिनिधि और कार्यकर्ता के बीच समन्वय की पूरी श्रृंखला को लेकर फीडबैक ले रहा है।
क्या बैठक का असर जिलों में दिखाई देगा?
अब असली परीक्षा बैठक के बाद शुरू होगी।
यदि प्रभारी मंत्री नियमित रूप से अपने जिलों में जाते हैं, जिला अध्यक्षों और कार्यकर्ताओं से बैठक करते हैं, विधायकों-सांसदों के साथ समन्वय बढ़ाते हैं और जनता से जुड़े मुद्दों का समाधान कराने की दिशा में सक्रिय होते हैं, तो संगठन की यह समीक्षा जमीन पर असरदार साबित हो सकती है।
लेकिन यदि बैठक में सामने आई शिकायतें केवल बैठक तक सीमित रह गईं, तो संगठन और कार्यकर्ताओं के बीच पैदा होने वाली दूरी भविष्य में चुनौती बन सकती है।
छत्तीसगढ़ भाजपा की यह दो दिवसीय बैठक केवल जिलों की सामान्य समीक्षा नहीं थी। इसमें सरकार के कामकाज, प्रभारी मंत्रियों की सक्रियता, संगठन की स्थिति, कार्यकर्ताओं की शिकायतें, प्रशासन से तालमेल और सत्ता-संगठन के संबंधों को एक साथ परखा गया।
सबसे बड़ा संदेश यही निकलकर सामने आया कि सत्ता में बैठे जनप्रतिनिधियों को संगठन के जमीनी कार्यकर्ताओं से लगातार संवाद रखना होगा।
मुख्यमंत्री से लेकर मंत्री, सांसद और विधायक तक यदि कार्यकर्ताओं की बात सुनते हैं, उनकी समस्याओं को गंभीरता से लेते हैं और जिला संगठन को साथ लेकर चलते हैं, तो इसका सीधा लाभ संगठन और सरकार दोनों को मिल सकता है।
संदेश स्पष्ट—संगठन सर्वोपरि
बैठक से निकला सबसे बड़ा राजनीतिक संदेश यही माना जा रहा है कि सत्ता संगठन का विकल्प नहीं है। मुख्यमंत्री से लेकर मंत्री, सांसद और विधायक तक सभी को संगठन के साथ कदम से कदम मिलाकर चलना होगा।
कार्यकर्ताओं की नाराजगी को नजरअंदाज करने के बजाय उनकी बात सुनकर समाधान की दिशा में आगे बढ़ने पर जोर दिया गया है। यही वजह है कि संगठन की बैठक में दिया गया यह संदेश भाजपा के भीतर एक सामान्य सलाह से अधिक, बल्कि सख्त संगठनात्मक निर्देश के रूप में देखा जा रहा है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि बैठक के बाद जनप्रतिनिधि कार्यकर्ताओं के साथ संवाद कितना बढ़ाते हैं और जमीनी स्तर से मिलने वाली शिकायतों व सुझावों पर कितना अमल होता है।
क्योंकि चुनाव जीतने के बाद सरकार चलती है, लेकिन सरकार और संगठन के बीच भरोसा बनाए रखने के लिए कार्यकर्ता की आवाज सुनना जरूरी होता है।











