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घरघोड़ा माननीय विशेष न्यायालय ने पास्को अक्ट के दुष्कर्म मामले में आरोपी को बीस वर्ष की सजा सुनाई, मामला धरमजयढ़ थाना क्षेत्र का .. पढ़े विस्तार से

माननीय जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, एफ.टी.एस.सी. (पॉक्सो) 

 

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घरघोड़ा – डेक्स 22 नवंबर 2025

समाज में महिला एवं बाल अपराध के बढ़ते मामलों पर न्यायालय सख़्त रूप अपनायें हुए हैं, इसके लिए न्याय व्यवस्था में (फास्ट ट्रैक कोर्ट) विशेष न्यायालय द्वारा तेज़ गति से सुनवाई करती है, और यह सुनिश्चित करती है ऐसे अपराध में अपराधी को कठोरतम सजा मिले जिससे समाज में यह भाव उत्पन्न हो कि न्यायालय ऐसे अपराधों को गंभीरता से लेती है, सभ्य समाज में इस तरह के अपराध व अपराधियों का भी कोई स्थान नहीं है, यह मानवीय आचरण में कतिपय स्वीकार नहीं है जब असहाय महिलाओं व निर्बाध बालक बालिकाओं के आत्म सम्मान उनके मनोबल शारीरिक दक्षता से खिलवाड़ हो शोषण हो।

घरघोड़ा विशेष न्यायालय ने इसी तरह के एक मामले में फैसला सुनाते हुए माननीय न्यायाधीश श्रीमान शहाबुद्दीन कुरैशी ने धरमजयगढ़ थाना क्षेत्र के मामले में आरोपी राहुल सिंह राजपूत को दुष्कर्म के मामले में दोषी करार देते हुए बीस साल सश्रम कारावास एवं 5500 रूपए के अर्थ दण्ड से दण्डित करने का दण्डादेश सुनाया है।

श्रीमती अर्चना मिश्रा लोक अभियोजक
श्रीमती अर्चना मिश्रा विशेष लोकअभियोजक अपर जिला एवं सत्र न्यायालय घरघोड़ा

मामले का संक्षिप्त विवरण बताते हुए विशेष लोकअभियोजक श्रीमती अर्चना मिश्रा ने बताया कि आरक्षी केन्द्र धरमजयगढ के अपराध क्रमांक 16/2023के अनुसार दिनांक 14/01/2023को आरोपी राहुल सिंह राजपूत ने पीड़ित को बहला फुसलाकर उसके माता-पिता के अनुमति के बिना शादी का प्रलोभन देकर भगा कर ले गया और उसके साथ जबरदस्ती शारीरिक संबंध स्थापित किया।

परिजनों की रिपोर्ट पर धरमजयगढ थाना प्रभारी ने तत्परता दिखाई और पीड़ित को आरोपी के कब्जे से बरामद कर प्रकरण में अग्रिम कार्यवाही की

विवेचना में आरोपी द्वारा अपराध किया जाना पाये जाने पर उसके विरुद्ध धारा 363 ,366,376 /2n भारतीय दण्ड संहिता एवं धारा 4, एवं धारा 6पाक्सो एक्ट के तहत चालान न्यायालय में प्रस्तुत किया था।

विशेष न्यायालय ने प्रकरण में विचारण उपरांत आरोपी को उपरोक्त मामले में सिद्ध दोष पाते हुए धारा 366भारतीय दण्ड संहिता के तहत पांच साल सश्रम कारावास एवं 500/रू जुर्माने से तथा धारा 6/1पाक्सो एक्ट के तहत बीस साल सश्रम कारावास एवं 5000/रू जुर्माने से दण्डित करने का दण्डादेश पारित किया है। उपरोक्त दोनों सजा साथ साथ चलेगी।

माननीय न्यायालय ने पीड़ित के परिवार को क्षतिपूर्ति के रूप में 400000/रू विधिक सेवा प्राधिकरण रायगढ़ के माध्यम से दिलाये जाने की अनुशंसा की है । राज्य की ओर से विशेष लोक अभियोजक श्रीमती अर्चना मिश्रा ने पैरवी की।

  • सुनवाई की प्रक्रिया 

इस अधिनियम के तहत, आरोपी को अपनी बेगुनाही साबित करने की जिम्मेदारी उठानी पड़ती है, न कि अभियोजन पक्ष को उसकी गलती साबित करनी पड़ती है, यह एक महत्वपूर्ण अंतर है।

  •  पॉक्सो एक्ट क्या है – (What is POCSO Act)

पॉक्सो एक्ट का निर्माण महिला एंव बाल विकास मंत्रालय द्वारा साल 2012 में Pocso Act – 2012 के नाम से किया गया था। 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों के साथ किसी भी प्रकार से सैक्सुअल शोषण करने वाले व्यक्ति पर इस एक्ट के तहत कार्यवाही की जाती है। इस कानून का निर्माण नाबालिग बच्चों के साथ हो रहे यौन उत्पीड़न, यौन शोषण, पोर्नोग्राफी और छेड़छाड़ के मामलों को रोकने के लिए किया गया था। इस कानून के द्वारा अलग-अलग अपराधों के लिए अलग सजा का प्रावधान है।

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