- रायगढ़ जिले के तमनार लैलूंगा घरघोड़ा पूंजीपथरा थाना क्षेत्र में खुड़खुड़िया जुआ का खेल खुलेआम देखने को मिलता है।
- रायगढ़ पुलिस अधीक्षक जुए के इस खेल पर कब होंगे गंभीर, शिकायतों के बाद भी कार्रवाई नही होने के मायने “संरक्षण” या अवैध कमाई का जरिया ? सुलगते सवालों के घेरे में खाकी आखिर कब लगेगा पूर्णतः लगाम।
रायगढ़ / घरघोड़ा डेक्स न्यूज 10 जनवरी 2026
ग्रामीण अंचलों में परंपरा, संस्कृति और मनोरंजन के नाम पर लगने वाले मेलों की आड़ में खुड़खुडिया जुआ तेजी से फैलता जा रहा है। मेला समाप्त होते ही जिस स्थान पर कभी बच्चों की हंसी, झूले और सांस्कृतिक कार्यक्रम गूंजते थे, वहीं अब देर रात तक जुए की महफिलें सज रही हैं। यह स्थिति न केवल सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुंचा रही है, बल्कि युवाओं को अपराध और नशे की राह पर भी धकेल रही है।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि मेला लगते ही बाहरी जुआरियों की आवाजाही बढ़ जाती है। खुले मैदानों, स्कूल परिसरों और खेतों के पास खुड़खुडिया जुआ बेखौफ खेला जाता है। हजारों से लाखों रुपये तक का दांव लगने की चर्चा आम हो चुकी है। विडंबना यह है कि सब कुछ खुलेआम होने के बावजूद जिम्मेदार विभाग और प्रशासनिक अमला मूकदर्शक बना हुआ है।
युवाओं पर बुरा असर
ग्रामीण क्षेत्र के युवा वर्ग इस अवैध गतिविधि की चपेट में सबसे अधिक है। त्वरित कमाई के लालच में कई युवा पढ़ाई-लिखाई छोड़ जुए में फंस रहे हैं। हार-जीत के बाद आपसी विवाद, मारपीट और चोरी जैसी घटनाएं भी सामने आने लगी हैं, जिससे गांव का शांत माहौल बिगड़ रहा है।
परिवार और समाज पर असर
जुए की लत के कारण कई परिवार आर्थिक संकट में आ गए हैं। मेहनत की कमाई कुछ ही घंटों में जुए की भेंट चढ़ जाती है। महिलाओं का कहना है कि घर-गृहस्थी चलाना मुश्किल हो गया है, वहीं बच्चों के भविष्य पर भी संकट मंडरा रहा है।
प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद कार्रवाई न के बराबर होती है। मेला के नाम पर अस्थायी अनुमति लेकर जुआरियों को खुली छूट मिल जाती है। सवाल यह उठता है कि क्या मेला संस्कृति की आड़ में अवैध जुए को संरक्षण दिया जा रहा है?
मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि
मेलों के दौरान सख्त निगरानी की जाए
खुड़खुडिया जुआ खेलने वालों पर कड़ी कार्रवाई हो
युवाओं को जागरूक करने विशेष अभियान चलाया जाए
यदि समय रहते इस पर अंकुश नहीं लगाया गया, तो ग्रामीण अंचलों में यह सामाजिक बीमारी और भयावह रूप ले सकती है। मेला संस्कृति को बचाने के लिए खुड़खुडिया जुए पर तत्काल और कठोर कार्रवाई अब समय की मांग है।










