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घरघोड़ा–तमनार–लैलूंगा में ‘हर घर नल जल’ दम तोड़ता, करोड़ों खर्च फिर भी नल सूखे. भीषण गर्मी में बूंद-बूंद को तरसेंगे गांव, जल जीवन मिशन पहले ही दम तोड़ चुका

नल लगे, टैंक बने… पर पानी गायब! घरघोड़ा –तमनार – लैलूंगा में जल जीवन मिशन फेल?

अधिकारी – ठेकेदार की मिलीभगत से चौपट जल जीवन मिशन, तीनों ब्लॉकों में पेयजल संकट?

करोड़ों डकार गए सिस्टम के लोग, घरघोड़ा – तमनार – लैलूंगा में ‘हर घर नल’ सपना टूटा?

Raigarh|Desk|Crime|jaljivanmisan|05/02/2026

रायगढ़। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन योजना, जिसका उद्देश्य ग्रामीण अंचलों में हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुँचाना है, रायगढ़ जिले के घरघोड़ा, तमनार और लैलूंगा विकास खण्ड में गंभीर आरोपों के घेरे में आ गई है। ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि योजना के क्रियान्वयन में अधिकारी और ठेकेदारों की मिलीभगत के चलते भारी भ्रष्टाचार हुआ है, जिसके कारण करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद नल-जल व्यवस्था दम तोड़ती नजर आ रही है।

कई गांवों में ओवरहेड टैंक और पाइपलाइन निर्माण तो कर दिए गए, लेकिन घटिया सामग्री के उपयोग के चलते कुछ ही महीनों में पाइप फटने, लीकेज और मोटर खराब होने की शिकायतें सामने आ रही हैं। आरोप है कि निर्माण कार्यों का तकनीकी निरीक्षण केवल कागज़ों तक सीमित रहा और मौके पर गुणवत्ता जांच नहीं की गई। परिणामस्वरूप, जिन गांवों में नियमित जल आपूर्ति शुरू होनी थी, वहां आज भी नल सूखे पड़े हैं।

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तमनार ब्लॉक के ग्रामीणों का कहना है कि कई स्थानों पर बिना पानी स्रोत सुनिश्चित किए ही टैंक खड़े कर दिए गए। वहीं लैलूंगा के पहाड़ी इलाकों में पाइपलाइन बिछाने में मानकों की अनदेखी की गई, जिससे बार-बार लाइन क्षतिग्रस्त हो रही है। घरघोड़ा क्षेत्र में दबाव कम होने और अनियमित सप्लाई की समस्या आम हो गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी मौके पर पहुंचना तक जरूरी नहीं समझते। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन योजना, जिसका उद्देश्य “हर घर नल से जल” है, रायगढ़ जिले के घरघोड़ा, तमनार और लैलूंगा विकास खण्डों में ज़मीनी हकीकत से जूझती नज़र आ रही है। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद कई गांवों में नल तो लगे हैं, लेकिन उनमें पानी नहीं, या फिर अनियमित और कम दबाव से सप्लाई मिल रही है। इससे ग्रामीणों की उम्मीदें टूटती दिख रही हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में ओवरहेड टैंक, पाइपलाइन और नल कनेक्शन का काम कागज़ों में लगभग पूरा बताया जा रहा है, मगर हकीकत में कई स्थानों पर ट्रायल सप्लाई के बाद नियमित जल आपूर्ति शुरू ही नहीं हो पाई। कहीं पाइपलाइन लीकेज, कहीं मोटर खराब, तो कहीं विद्युत आपूर्ति बाधा बन रही है। परिणामस्वरूप महिलाएं आज भी दूर-दराज़ के हैंडपंपों और कुओं पर निर्भर हैं।

तमनार ब्लॉक के कई गांवों में स्थानीय लोगों का कहना है कि टैंक बने महीनों बीत गए, लेकिन पानी सप्ताह में एक-दो दिन ही आता है। लैलूंगा क्षेत्र में पहाड़ी और दुर्गम इलाकों के कारण पाइपलाइन रखरखाव बड़ी चुनौती बना हुआ है। वहीं घरघोड़ा ब्लॉक में कुछ गांवों में नल कनेक्शन तो हैं, पर दबाव इतना कम कि बाल्टी भरना भी मुश्किल हो जाता है।

ग्रामीणों का आरोप है कि योजना के संचालन और रखरखाव पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा। ग्राम पंचायतों और ठेकेदारों के बीच जिम्मेदारी तय न होने से शिकायतें लंबित पड़ी हैं। कई जगहों पर पानी की गुणवत्ता जांच भी नियमित नहीं हो पा रही, जिससे आयरन व बैक्टीरिया की आशंका बनी रहती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि जल जीवन मिशन की सफलता के लिए स्थायी जल स्रोत, समयबद्ध मरम्मत और स्थानीय जल समितियों (VWSC) की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। केवल निर्माण कार्य पूरा कर देना पर्याप्त नहीं, बल्कि नियमित सप्लाई और गुणवत्ता सुनिश्चित करना भी उतना ही अहम है।

ग्रामीणों ने मांग की है कि प्रशासन ब्लॉकवार ऑडिट, दोषपूर्ण कार्यों पर ठेकेदारों पर कार्रवाई, और टोल-फ्री/ऑनलाइन शिकायतों का त्वरित निराकरण सुनिश्चित करे। साथ ही, बिजली कटौती वाले क्षेत्रों में सोलर पंप जैसी वैकल्पिक व्यवस्था की जाए।

यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो “हर घर नल जल” का सपना इन विकास खण्डों में सिर्फ आंकड़ों तक सिमट कर रह जाएगा। जरूरत है कि प्रशासन, पंचायत और विभाग मिलकर योजना को कागज़ से निकालकर ज़मीन पर पूरी ताकत से उतारें, ताकि ग्रामीणों को वास्तव में शुद्ध और नियमित पेयजल मिल सके।

सूत्रों के अनुसार, कई कार्यों में माप पुस्तिका (एमबी) और भुगतान में भी अनियमितताएं की गई हैं। कागज़ों में कार्य पूर्ण दिखाकर ठेकेदारों को भुगतान कर दिया गया, जबकि वास्तविकता में काम अधूरा या मानकविहीन है। इससे शासन को आर्थिक क्षति के साथ-साथ ग्रामीणों को पेयजल संकट झेलना पड़ रहा है।

ग्रामीण महिलाओं का कहना है कि “हर घर नल जल” का सपना दिखाकर अब भी उन्हें दूर-दराज़ के हैंडपंपों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। गर्मी के मौसम में हालात और बिगड़ जाते हैं, जब हैंडपंप सूखने लगते हैं और नल-जल योजना पूरी तरह फेल साबित होती है।

जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच, ब्लॉकवार तकनीकी ऑडिट, और दोषी अधिकारियों व ठेकेदारों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। साथ ही, भविष्य में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए ग्राम जल समितियों को मजबूत किया जाए और सभी कार्यों की सार्वजनिक निगरानी हो। यदि समय रहते भ्रष्टाचार पर लगाम नहीं लगाई गई, तो जल जीवन मिशन जैसी जनहितकारी योजना केवल फाइलों और आंकड़ों तक सिमटकर रह जाएगी। जरूरत है कि प्रशासन सख्ती दिखाए, ताकि ग्रामीणों को वास्तव में शुद्ध और नियमित पेयजल मिल सके।

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