
अधिवक्ता सुनील ठाकुर, सत्यजीत शर्मा की ठोस पैरवी का परिणाम मृतक परिवार को मिला उचित मुआवजा ।
घरघोड़ा से विनोद दास महंत (बंटी) /
घरघोड़ा – जिला अपर एवं सत्र न्यायालय घरघोड़ा द्वारा पीड़ित परिवार के पक्ष में सार्थक व उल्लेखनीय फैसला सुनाया है, भारतीय संविधान में भारतीयों के जीवन से जुड़े हर एक पहलू को ध्यान रख कर अधिकार निहित है, मौलिक अधिकारों की स्वतंत्रता के साथ मौलिक जिम्मेदारी व मौलिक जवाबदेही भी तय किया गया है। इसी क्रम मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (Motor Accident Claims Tribunal) यह अधिकरण मोटर वाहन अधिनियम – 1988 के तहत गठित है, मोटर वाहन दुर्घटनाओं के पीड़ितों या उनके परिवार को मुआवज़ा दिलाने के लिए एक न्यायिक निकाय है जो न्यायालयीन व्यवस्था है, आधुनिक युग में मोटर मशीन दुर्घटनाओं के मामले आय दिन सामने आते हैं, जिसमें पीड़ित पक्ष कमज़ोर ना हो इस लिए मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण बनाया गया है, न्याय व्यवस्था में इसका जिवंत उदाहरण घरघोड़ा जिला अपर एवं सत्र न्यायालय के आदेश को देखने को मिलता है, जहां जिला एवं अपर सत्र न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण और राहत देने वाला फैसला सुनाया है। इस निर्णय में अधिकरण ने सड़क दुर्घटना में मृतक के परिजनों को 1 करोड़ रुपये से अधिक का मुआवजा प्रदान करने का आदेश दिया है। यह निर्णय अधिवक्ता सुनील ठाकुर और सत्यजीत शर्मा की सशक्त और तथ्यपरक पैरवी का परिणाम माना जा रहा है।
दुर्घटना का सारांश
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मृतक सुभाष पैकरा (कृषि विस्तार अधिकारी) ग्राम पंचायत चारभाठा घरघोड़ा निवासी सामान्य दिन की तरह अपने परिवारिक कार्य से परिवार सहित जिसमें स्वयं व पत्नी बच्ची कार में सवार होकर जा रहा था, तभी सामने से आ रही एक तेज रफ्तार वाहन ने लापरवाही से टक्कर मार दी। दुर्घटना इतनी गंभीर थी कि आहत सुभाष गंभीर रूप से घायल हो गया आनन फानन में रायगढ़ अस्पताल लाया गया मामला गंभीर होने पर डाक्टर की सलाह पर रायपुर के निजी अस्पताल में कुछ दिन इलाज चलता रहा भीतरी घाव होने के कारण डाक्टर लगातार प्रयास कर रहे थे जीवित रखने का जिसमें बहुत से रूपए भी खर्च हो रहे थे लेकिन अथक प्रयास व कई दिनों के इलाज के बाद भी डाक्टर सुभाष को बचाने में कामयाब नहीं हो सके और इलाज के दौरान ही मृत्यु हो गई। इस दुर्घटना के बाद परिवार पर आर्थिक और मानसिक संकट का पहाड़ टूट पड़ा परिवार असाहय हो गया। मृतक परिवार का मुख्य कमाने वाला सदस्य था उसकी मृत्यु से पत्नी, पुत्र, और परिवार पर जीविका का संकट खड़ा हो गया। परिवार ने न्याय की उम्मीद में मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण में आवेदन प्रस्तुत किया।
अधिवक्ताओं की ठोस पैरवी
परिवार की ओर से अधिवक्ताओं सुनील ठाकुर और सत्यजीत शर्मा, विनोद पटेल ने दुर्घटना की FIR,पंचनामा, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मृतक की आय संबंधी दस्तावेज़, उम्र, आश्रितों की स्थिति, और भविष्य की संभावित आय जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज़ अदालत में प्रस्तुत किए। अधिवक्ताओं ने यह स्थापित किया कि दुर्घटना पूर्णत: वाहन चालक की लापरवाही से हुई थी और मृतक परिवार का आधार स्तंभ था। उन्होंने अदालत के समक्ष सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के महत्वपूर्ण निर्णयों का उल्लेख करते हुए उच्चतम मुआवजा देने की मांग की।
न्यायालय का निर्णय
सभी तथ्यों पर परिवार को ₹1,02,00,000 (एक करोड़ दो लाख रुपये) मुआवजा दिया जाना उचित है। घटना में घायल मृतका की पत्नी को 130000 ₹ (तेरह लाख रूपया) की मुआवजा अलग से और देने का आदेश पारित किया गया है। न्यायालय के इस निर्णय ने दुर्घटनाओं में लापरवाही से पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा देना न्याय की मूल भावना व्यक्त हुआ है।
यह निर्णय क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है, क्योंकि ऐसी दुर्घटना दावा याचिकाओं में इतनी बड़ी राशि का मुआवजा कम ही देखने को मिलता है। परिवार ने निर्णय को न्याय की जीत और अपने प्रियजन के लिए सम्मानजनक राहत बताया है।
मृतक के परिजनों ने माननीय न्यायालय और अधिवक्ता सुनील ठाकुर ,सत्यजीत शर्मा और विनोद पटेल का आभार व्यक्त किया, जिनकी प्रभावी दलीलों ने उन्हें न्याय दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
मृतक के परिजनों ने माननीय न्यायालय और अधिवक्ता सुनील ठाकुर ,सत्यजीत शर्मा और विनोद पटेल का आभार व्यक्त किया, जिनकी प्रभावी दलीलों ने उन्हें न्याय दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।









